Class 8 Hindi Sem 2 Chapter 3 Swadhyay (ધોરણ 8 હિન્દી અભ્યાસ અને સ્વાધ્યાય)

Class 8 Hindi Sem 2 Chapter 3 Swadhyay
Class 8 Hindi Sem 2 Chapter 3 Swadhyay

Class 8 Hindi Sem 2 Chapter 3 Swadhyay

Class 8 Hindi Sem 2 Chapter 3 Swadhyay. ધોરણ 8 હિન્દી સેમ 2 એકમ 3 અભ્યાસ અને સ્વાધ્યાય. ધોરણ 8 હિન્દી અભ્યાસ અને સ્વાધ્યાય.

कक्षा : 8

विषय : हिन्दी

एकम : 3. मत बाँटो इंसान को

सत्र : द्वितीय

अभ्यास

प्रश्न 1. प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

(1) इंसान को बाँटने का अर्थ क्या है?

उत्तर : इंसान को बाँटने का अर्थ है – सभी मनुष्यों को समान दृष्टि से न देखना। आज ऊँच-नीच, जाति-पाँति, गोरा-काला आदि भेद कर लोगों में अलगाव की भावना पैदा कर दी गई है। सभी मनुष्यों के रक्त में एक जैसी लालिमा तथा उनमें एक जैसी भावनाओं की अनदेखी कर केवल उनके बाहरी स्वरूप पर ध्यान दिया गया है। इस प्रकार इंसान का बँटवारा किया गया है।

(2) लोगों ने भगवान को किस प्रकार बाँट लिया है?

उत्तर : कुछ लोगों के भगवान मंदिर में तो कुछ लोगों के भगवान मस्जिद में रहते हैं। कुछ लोगों ने अपने भगवान के लिए गिरजाघर बनाए हैं। एक ही भगवान को लोगों ने अलग-अलग ढंग से देखा है। वे उनकी अलग-अलग तरीके से पूजा करते हैं। इस तरह लोगों ने भगवान को बाँट लिया है।

(3) चट्टानों की प्यास कैसे बुझाई जा सकती है?

उत्तर : चट्टान का अर्थ है वे लोग जो भेदभावों के जुल्म सहते-सहते पत्थर जैसे कठोर हो गए हैं। हमें उन लोगों के साथ समानता का व्यवहार करना है। उन्हें भी अपनत्व प्रदान करना है। इस प्रकार प्यार का शीतल जल देकर चट्टानों की प्यास बुझाई जा सकती है।

प्रश्न 2. इस काव्य को आरोह-अवरोह के साथ गाइए तथा समूहगान कीजिए :

उत्तर : टेपरिकार्ड या सीडी पर इस काव्य को सुनाइए। फिर लय-ताल का ध्यान रखते हुए इसे गाइए। कक्षा में सभी छात्र मिलकर इसका समूहगान करें।

प्रश्न 3. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों का भावार्थ बताइए :

अभी राह तो शुरू हुई है, मंजिल बैठी दूर है।

उजियाला महलों में बंदी, हर दीपक मजबूर है।

उत्तर : दुनिया में समानता की भावना फैलने की अभी तो शुरुआत हुई है। समानता का भाव पूरी तरह फैलने में अभी देर है – उसके लिए अभी बहुत प्रयत्न करने पड़ेंगे। बिजली की रोशनी अभी केवल महलों – धनी लोगों के घरों में ही है। गरीबों के घरों में अब भी दीपक ही जल रहे हैं।

स्वाध्याय

प्रश्न 1. प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

(1) कविता के अनुसार अब तक किन चीजों का बंटवारा हो चुका है?

उत्तर : कविता के अनुसार अब तक मंदिर, मस्जिद और गिरजाघर आदि के रूप में भगवान का बँटवारा हो चुका है। इसी तरह भिन्न-भिन्न देशों के रूप में धरती और सागर भी बाँट लिए गए हैं।

(2) किसकी मुस्कान को कोई रौंद नहीं पाएगा?

उत्तर : सर्वत्र समानता का भाव फैलने पर लोगों में परस्पर अपनत्व की खुशी होगी। तब कोई किसी पर जुल्म कर उसकी मुस्कान को रौंद नहीं पाएगा अर्थात् नष्ट नहीं कर सकेगा।

(3) हरी-भरी धरती को कौन-सी परिस्थितियाँ रेगिस्तान में बदल सकती हैं?

उत्तर : वर्षा के लगातार अभाव और भूकंप के तेज झटके धरती की हरियाली नष्ट कर सकते हैं। प्रकृति के ये रौद्र रूप हरी-भरी धरती को रेगिस्तान में बदल सकते हैं।

(4) उजाले को बंदी बनाने का क्या अर्थ हैं?

उत्तर : उजाले को बंदी बनाने का अर्थ है – उसे अपने अधिकार में रखना। इसीलिए बिजली की रोशनी अभी धनवानों के घरों में ही दिखाई देती है, गरीबों की झोंपड़ियों में नहीं।

(5) यह कविता हमें क्या संदेश देती है?

उत्तर : यह कविता विश्व के लोगों को सभी तरह के भेदभाव भूलकर मेल-मिलाप से रहने की सीख देती है। इस प्रकार यह हमें विश्वबंधुत्व का संदेश देती है।

प्रश्न 2. निम्नलिखित शब्दों को शब्दकोश के क्रम में लिखिए :

प्यासी, आँगन, सागर, इंसान, वितान, ऊपर, रेगिस्तान, मंजिल, घाटी, गिरजाघर, मुस्कान, चट्टान, उदास, बंदी।

उत्तर : आँगन, इंसान, उदास, ऊपर, गिरजाघर, घाटी, चट्टान, प्यासी, बंदी, मंजिल, मुस्कान, रेगिस्तान, वितान, सागर ।

प्रश्न 3. आज के इस आधुनिक परिवेश में संयुक्त परिवारों की जगह एकल परिवारों ने ले ली है। एकल परिवार के पक्ष-विपक्ष पर कक्षा में चर्चा कीजिए।

उत्तर :

शिक्षक : आज संयुक्त परिवारों की जगह एकल परिवारों की हवा चल रही है। सुभाष, तुम इस बारे में क्या सोचते हो?

सुभाष : गुरुजी, समय के अनुसार जो परिवर्तन होते हैं, वे अच्छे ही होते हैं। आज संयुक्त परिवार बूढ़े व्यक्ति की तरह ही बूढ़े और अनुपयोगी हो गए हैं।

प्रशांत : गुरुजी, संयुक्त परिवार बरगद के वृक्ष की तरह होते हैं। उनका महत्त्व न समझनेवाले ही उनकी बुराई करते हैं

सुरेश : गुरुजी, हमारा परिवार एकल परिवार है। पिताजी, माँ, दीदी और मैं – बस ये चार जन ही हमारे परिवार के सदस्य हैं। घर में बड़ी शांति रहती है। जब हम संयुक्त परिवार में थे, तब रोज आपस में झगड़े होते थे। पुरुष खर्च के बारे में और महिलाएँ काम के बारे में झगड़ती थीं। हम शांति से पढ़ भी नहीं सकते थे। इसलिए मैं तो एकल परिवार ही पसंद करता हूँ।

कमल : गुरुजी, मैं भी प्रशांत की बात का समर्थन करता हूँ। जब मेरी माँ बीमार हो जाती है, तब मुझे बहुत काम करना पड़ता है। ब्रेड खाकर ही काम चलाना पड़ता है। पिताजी शाम को आते हैं, तब खिचड़ी बनती है। यदि संयुक्त परिवार होता, तो दादी या चाची के हाथ का खाना हमें मिल सकता था।

सुमन : गुरुजी, एकल परिवार में बच्चे बिगड़ जाते हैं। हमारे पड़ोस का लड़का माँ-बाप के न रहने पर इंटरनेट पर वह सब कुछ देखता है, जो उसे नहीं देखना चाहिए। बच्चों के चरित्र को बिगाड़ने में एकल परिवार जिम्मेदार है।

राजेश : गुरुजी, हमारे पड़ोस में संयुक्त परिवार है। कोई बीमार होकर अस्पताल जाता है तो बारी-बारी से घर के सदस्य उसकी देखभाल करते हैं। क्या एकल परिवार में यह संभव है?

शिक्षक : हाँ, तुम्हारी बात ठीक है। संयुक्त परिवार में सहयोग की जो सुविधा होती है, वह एकल परिवार में संभव नहीं है। परंतु परिवार की शांति और आर्थिक दृष्टि से समय की माँग एकल परिवार हैं।

प्रश्न 4. अपूर्ण काव्य को पूर्ण कीजिए :

रात होने पर मैं निकलता

सबको देता हूँ शीतलता।

उत्तर : रात होने पर मैं निकलता

सबको देता हूँ शीतलता।

मुझे देख सबके दिल बहलते।

बच्चे मुझे पाने को मचलते।

सब कहते हैं मुझको ‘मामा’।

हर बालक है मेरा भाँजा।

यों तो मैं तारों का राजा।

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